July 25, 2010

Sequel to previous tit bit

Adolescent love is developed quite easily, and, it breaks with the same easiness, of course, not all the time!

   हम और तुम
  साथ ही  चल रहे थे,
  जाने कब हमारा साथ
  धूप-छांव  बन गया!
  और,
  हाथ उठा कर
  तुम्हे छु  लेने का दंभ*
  रेत बन कर
  हाथ से फिसलने लगा!!

[*proud ]

hindi tit bits continued !

I have tried to reflect tender love and breaks of adolescent age in following lines:

  नर्म  सोंधी सी निर्दोष
 मिटटी पर खिला
 एक कोमल अंकुर-
 मेरा प्यार.
 धुप कुछ तेज खिल गयी,
 वो घबरा गयी,
 चली गयी.
 जमीन कड़ी हो
 चटक गयी,और
 अंकुर मुरझा गया.

July 19, 2010

My Hindi tit bits-2

So here is another naughty kid....

 नन्ही   मुन्नी
   रखे  चंचंलता  से  दांत  काटी  रोटी;
 बड़े  बूढों  की  डांट फटकार
   चोटि  मैं
   रीबन  की  तरह  बांध
   सर झटक कर
   पीछे फेक देती है,और,
 आँखों मैं रंग बिरंगे गुलाल लिए
    ओंठो  पर
    हास्य के ढेर से सुर,
    फिर उन्ही की गोद भर देती है,
 ऐसी चंचल है मुन्नी ,
    मेरी नन्ही मुन्नी

My Hindi tit bits

Inspired by a blogger's poem/translation about young students how they react after their schools are opened, my attention is gone to children's behaviour how they annoy elders and how promptly they devise to make them smile!So here is one case------

   " मम्मी की तेज आंखे!
      और मैं सहम कर
       बस इतना ही करती हूँ..
    अपनी कॉपी पर
     मम्मी की मूरत बना
      माथे पर
      एक नन्ही बिंदी रख देती हूँ;
 और बस
  मम्मी की आँखों मैं
   अनगिनत गेसू  खिल उठते  है
 बाहें  उठती  हैं और
  हमारा प्यार
   इन्द्रधनुषी हो उठता  हैं"