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October 20, 2013

वो तुम्हारा 'समय'...

What a life is it?You meet someone,love n like each other...and then this is changing time which brings life upside down!
"स्मृति के पट
 खोले 
बाहर देख रहा हूँ. 
इतने में 
धीरे से वर्षा आ जाती है,
 सब दृश्य अपने में  
समेट  कर 
एक पर्दा
 मेरे आगे तान देती है-
एक धुंधला जोड़ा 
दूर कहीं दूर 
दृष्टिगोचर होता है,और
 कुछ पीछे 
माध्यम गति में जाता   
एक झुके कंधो वाला वाला व्यक्ति;
दृश्य स्पष्ट होता है-
जोड़े मैं स्त्री 
'तुम' हो, 
तुम मुस्कराती हो. 
तुम्हारा साथी हँस  रहा है,
वो 'समय' है. 
झुके कंधो वाला 'मैं' हूँ. 
अपितु कहो-
मैं झुक कर देखता हुआ 
तुम्हारे उन पद चिन्हों से 
अपने पद 
मिला रहा हूँ,
जिनसे,कभी अपने पद मिला कर 
न चल सका था!"





August 30, 2013

शब्दों से क्या सरोकार है...

  सब कुछ बदल रहा है. अपने आस पास की हर वस्तु का रंग रूप बदल रहा है. लेकिन शायद यह परिवर्तन मेरे ही अन्दर आया है जिसे नाम देना कठिन लगा. मेरे अंतर में यह आवाज उठ रही है कि इस बदलाव का शब्दों से कोई सरोकार नहीं है !
 
 मैंने 'चिड़िया' से कहा,
  "मैं तुम पर एक 
 कविता लिखना चाहता हूँ"
  चिड़िया ने मुझ से पूछा 
" तुम्हारे शब्दों मैं 
  मेरे परो की रंगीनी है ?
 मैंने कहा "नहीं"
  "तुम्हारे शब्दों मैं मेरे कंठ का संगीत है ?
" नहीं"
  "तुम्हारे शब्दों मैं 
 मेरे डैनो की उड़ान है?
  "नहीं"
 "जान है?"
  "नहीं"
 वह इठला कर बोली,"तब 
  तुम मुझ पर 
 कविता क्या लिखोगे?"
  मैं कह उठा,
 "पर तुमसे
  मुझे प्यार है"
 वो बोली,
  "प्यार का    
 शब्दों से क्या सरोकार है?"
  एक अनुभव हुआ नया !
 मै मौन हो गया.